ये है करोड़पतियों का गांव, यहां न पानी की कमी है और न ही हरियाली की

ये है करोड़पतियों का गांव, यहां न पानी की कमी है और न ही हरियाली की

ये है हिवरे बाजार गांव। यह महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में आता है। यहां की आबादी 300 लोगों से ज्यादा है, जिसमें से 80 से ज्यादा लोग करोड़पति हैं। महाराष्ट्र फिलहाल सूखे की चपेट में है, पर इस गांव में न पानी की कमी है, न हरियाली की। जानें कैसे बदली गांव की किस्मत…

– इस गांव की किस्मत यहां के लोगों ने खुद लिखी है। क्योंकि 1990 में यहां 90 फीसदी परिवार गरीब थे।
– इस बारे में गांव के सरंपच पोपट राव कहते हैं कि हिवरे बाजार 80-90 के दशक में भयंकर सूखे से जूझा। पीने तक के लिए पानी नहीं बचा।
– कुछ लोग अपने परिवारों के साथ दूसरी जगहों पर चले गए। गांव में महज 93 कुएं ही थे।
– वाटर लेवल भी 82-110 फीट नीचे पहुंच गया था। लेकिन फिर लोगों ने खुद को बचाने की कवायद शुरू की।
ऐसे बदली गांव की तस्वीर
– सूखे से निपटने के लिए 1990 में एक कमेटी, ज्वाइंट फॉरेस्ट मैनेजमेंट कमेटी बनाई गई। इसके तहत गांव में कुआं खोदने और पेड़ लगाने का काम श्रमदान के जरिए शुरू किया गया।
– इस काम में, महाराष्ट्र इम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम के तहत फंड मिला, जिससे काफी मदद मिली। साल 1994-95 में आदर्श ग्राम योजना आई, जिसने इस काम को और रफ्तार दे दी।
– फिर कमेटी ने गांव में उन फसलों को बैन कर दिया, जिनमें ज्यादा पानी की जरूरत थी।
– पोपट राव ने बताया कि अब गांव में 340 कुएं है। ट्यूबवेल खत्म हो गए हैं और जमीन का वाटर लेवल भी 30-35 फीट पर आ गया है।
गांव में 80 करोड़पति परिवार
– सरपंच पोपट राव के मुताबिक, गांव के 305 परिवार रहते हैं। इनमें से करीब 80 करोड़पति परिवार हैं।
– वे बताते हैं कि यहां सभी लोगों की मुख्य आय खेती से ही होती है। यह लोग सब्जी उगाकर ज्यादातर कमाई करते हैं।
– हर साल इनकी आय बढ़ रही है। खेती के जरिए जहां 80 परिवार करोड़पति के दायरे में आ गए हैं। वहीं, 50 से अधिक परिवारों की सालाना इनकम 10 लाख रुपए से ज्यादा है।
– गांव की प्रति व्यक्ति आय देश के टॉप 10 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों के औसत आय (890 रुपए प्रति माह) की दोगुनी है। यानी पिछले 15 वर्षों में औसत आय 20 गुनी हो गई है।
पीएम मोदी ने मन की बात में की थी तारीफ…
पीएम नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को ‘मन की बात’ में हिवरे बाज़ार की तारीफ करते हुए कहा था कि पानी का मूल्य क्या है, वो तो वही जानते हैं, जिन्होनें पानी की तकलीफ झेली है। और इसलिए ऐसी जगह पर, पानी के संबंध में एक संवेदनशीलता भी होती है और कुछ-न-कुछ करने की सक्रियता भी होती है। महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले के हिवरे बाज़ार ग्राम पंचायत पानी की समस्या से निपटने के लिए क्रॉपिंग पैर्टन को बदला और पानी ज्यादा उपयोग करने वाली फसलों को छोड़ने का फैसला लिया। सुनने में बात बहुत सरल लगती है, लेकिन इतनी सरल नहीं है।
पांच साल का प्लान बनाया
-पोपट राव ने बताया कि गांव को बचाने के लिए यशवंत एग्री वाटर शेड डेवलपर्स एनजीओ के साथ मिलकर पांच साल का प्लान बनाया गया था।
– इसके तहत गांव में कुएं खोदे जाने थे। पेड़ लगाने थे। गांव को 100 फीसदी शौचालय वाले गांव में शुमार करना था।
– उन्होंने बताया कि एक बार लोग जुड़े तो जुनून कुछ ऐसा हो गया कि पांच साल का प्लान 2 साल में ही खत्म हो गया।
ये है करोड़पतियों का गांव, यहां न पानी की कमी है और न ही हरियाली की

इन ← → पर क्लिक करें

loading...
loading...
शेयर करें